जयपुर। टोंक रोड, सांगानेर स्थित श्री पिंजरापोल गोशाला परिसर में संचालित नंदिनी सत्संग भवन को लेकर सनातन सेवा ने मुख्यमंत्री और जयपुर विकास प्राधिकरण को पत्र भेजकर भवन की वैधानिक जांच पूरी होने तक उसकी व्यावसायिक एवं आयोजन गतिविधियां बंद कराने तथा भवन को सील करने की मांग की है। संगठन ने भवन के निर्माण और संचालन से संबंधित स्वीकृतियों की जांच के लिए सात दिन का समय देते हुए कार्रवाई नहीं होने पर जेडीए कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
सनातन सेवा के प्रमुख राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पाठक ने पत्र में आरोप लगाया कि गौशाला की भूमि गौसेवा एवं गौवंश के संरक्षण के लिए है, लेकिन नंदिनी सत्संग भवन में विवाह, सामाजिक और अन्य व्यावसायिक आयोजन होने से परिसर में बड़ी संख्या में लोग और वाहन पहुंचते हैं। उन्होंने दावा किया कि तेज संगीत, डीजे, लाउडस्पीकर, वाहनों के हॉर्न, धुएं, धूल, प्लास्टिक कचरे और देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों से गौवंश प्रभावित हो रहा है। वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना का खतरा भी बताया गया है।
निर्माण की स्वीकृतियों की जांच की मांग
पत्र में नंदिनी सत्संग भवन के भवन मानचित्र, भूमि उपयोग परिवर्तन, पूर्णता एवं अधिभोग प्रमाणपत्र, अग्निशमन एनओसी, संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र, पार्किंग योजना और विद्युत कनेक्शन की वैधानिकता की जांच की मांग की गई है। साथ ही निर्माण के दौरान जेडीए अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण और जारी नोटिस की जानकारी भी मांगी गई है। संगठन ने आरोप लगाया कि यदि आवश्यक अनुमतियां नहीं ली गई हैं तो भवन को अनधिकृत घोषित कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
72 घंटे में संयुक्त निरीक्षण की मांग
सनातन सेवा ने पत्र प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर जेडीए, नगर निगम, राजस्व, गोपालन, प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, विद्युत और पुलिस विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम से स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है। जांच पूरी होने तक भवन की बुकिंग, विवाह समारोह, सामाजिक कार्यक्रम, डीजे, लाउडस्पीकर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां रोकने तथा वाहनों का गौशाला परिसर में प्रवेश बंद करने की मांग की गई है। संगठन ने भवन में आयोजित कार्यक्रमों के बुकिंग रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड, जीएसटी रिकॉर्ड, रसीदें और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने तथा भवन से प्राप्त आय का विशेष ऑडिट कराने की मांग भी की है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद डीजे एवं लाउडस्पीकर पर रोक लगाने और गौवंश पर पड़े कथित पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन कराने की मांग की गई है।
पूर्व शिकायतों और हाईकोर्ट प्रकरण का भी उल्लेख
पत्र में पिंजरापोल गौशाला प्रबंधन से संबंधित पूर्व शिकायतों, विभागीय जांच और अन्य कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने वित्तीय अनियमितताओं, गौवंश की संख्या में कथित अंतर, दान एवं व्यावसायिक आय में पारदर्शिता, भूमि उपयोग, अनधिकृत निर्माण, विद्युत दुर्घटना सहित विभिन्न मामलों की जांच की मांग की है। पत्र में पूर्व में दर्ज एफआईआर की वर्तमान स्थिति, जांच अधिकारी, धाराओं और चालान से संबंधित प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
सनातन सेवा ने बताया कि पिंजरापोल गौशाला से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में डीबी सिविल रिट पिटीशन नंबर 9364/2026 लंबित है। पत्र में 4 अगस्त 2026 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
सात दिन में कार्रवाई नहीं तो धरना
अशोक पाठक ने कहा कि पत्र प्राप्त होने के सात दिन के भीतर नंदिनी सत्संग भवन की आयोजन एवं व्यावसायिक गतिविधियां बंद नहीं हुईं, भवन को वैधानिक जांच तक सील नहीं किया गया और कथित अनधिकृत निर्माण एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू नहीं हुई तो गौभक्तों, साधु-संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के सहयोग से जेडीए कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण एवं कानूनसम्मत धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी सूचना पुलिस और जिला प्रशासन को नियमानुसार दी जाएगी। साथ ही मामले को हाईकोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत करने की बात कही गई है।





