जयपुर। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर 5 नवंबर 2026, गुरुवार को रमा एकादशी और गोवत्स द्वादशी का पर्व मनाया जा रहा है। श्री राधासर्वेश्वर पंचांग के अनुसार आज एकादशी तिथि सुबह 10:34 बजे तक रहेगी। दीपावली से पहले आने वाले इन दोनों पर्वों को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। इन्हें दीपावली उत्सव की शुरुआत भी माना जाता है। पंचांग के अनुसार वर्तमान में विक्रम संवत 2083, युगाब्द 5127 और शक संवत 1948 चल रहा है। संवत्सर रौद्र, ऋतु हेमंत, सूर्य दक्षिणायन और मास कार्तिक है।
पंचांग- 05.11.2026
युगाब्द – 5127
विक्रम संवत् – 2083
शाक:- 1948
संवत्सर – रौद्र
ऋतु – हेमन्त
सूर्य – दक्षिणायन
मास – कार्तिक
पक्ष – कृष्ण पक्ष
वार – गुरुवार
तिथि – एकादशी 10:34
🚩🌺||आज विशेष||🌺🚩
👉🏻 रमा एकादशी /गोवत्स द्वादशी
🍁||अग्रिम पर्वोत्सव|| 🍁
👉🏻 धनतेरस /प्रदोष व्रत
06/11/26 (शुक्रवार)
👉🏻 नरक /रूप चतुर्दशी
07/11/26 (शनिवार)
👉🏻 दीपावली
08/11/26 (रविवार)
👉🏻 देव कार्य अमावस
09/11/26 (सोमवार)
रमा एकादशी का क्या है महत्व?
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। रमा का अर्थ मां लक्ष्मी से है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रमा एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अंत में बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, तुलसी के पास दीपक जलाते हैं और भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ करते हैं।
गोवत्स द्वादशी पर होती है गाय-बछड़े की पूजा
गोवत्स द्वादशी को वत्स द्वादशी और बछ बारस के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है। इस दिन गाय और उसके बछड़े की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए गाय की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है।
इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख और सुरक्षा की कामना से व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार गाय और बछड़े को तिलक लगाकर गुड़-रोटी खिलाई जाती है। साथ ही गौशालाओं में दान करने का भी महत्व बताया गया है। इस दिन गाय के दूध, दही और घी से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता। इसे बछड़े के प्रति प्रेम और त्याग का प्रतीक माना जाता है।
दीपावली से पहले आने वाले प्रमुख त्योहार
रमा एकादशी और गोवत्स द्वादशी के बाद दीपावली से जुड़े प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। इनकी तारीखें इस प्रकार हैं:
- 6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस और प्रदोष व्रत
- 7 नवंबर, शनिवार: नरक चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी
- 8 नवंबर, रविवार: दीपावली
- 9 नवंबर, सोमवार: देव कार्य अमावस्या
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रमा एकादशी को आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु-मां लक्ष्मी की आराधना का पर्व माना जाता है, जबकि गोवत्स द्वादशी पर गौ-माता और संतान के कल्याण की कामना की जाती है। इन दोनों पर्वों के बाद धनतेरस से दीपावली उत्सव की रौनक शुरू हो जाती है।



