जयपुर, 27 सितंबर। पितृपक्ष के दौरान रविवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर प्रतिपदा श्राद्ध किया जाएगा। इस दिन उन पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिनका निधन किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। पितृपक्ष का यह क्रम 10 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त विधि-विधान से कर्मकांड और दान-पुण्य करेंगे।
पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 27 सितंबर की रात 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। रविवार को वृद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक कुतुप मुहूर्त को विशेष शुभ माना गया है।
दिन में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:53 से 5:40 बजे तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। सूर्योदय सुबह 6:11 बजे और सूर्यास्त शाम 6:12 बजे होगा।
मान्यता है कि प्रतिपदा तिथि पर श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। संतानहीन नाना-नानी के श्राद्ध का विधान भी इस तिथि पर बताया गया है।





