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धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में राजस्थान प्रथम, पीएम जनमन में उत्कृष्ट उपलब्धि, भजनलाल शर्मा जनजाति वर्ग के समर्ग उत्थान के लिए कर रहे हर सम्भव प्रयास

आजादी से कुछ साल पहले तक देशभर के जनजाति बहुल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा तो क्या, सहायक धारा में भी शामिल नहीं थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस सच्चाई को गहराई से समझा कि भारत की आत्मा उसकी जनजातियों में बसती है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) अभियान इसी वर्ग की सेवा और सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इन दोनों अभियान को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया, राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के फंड से इनमें कन्वर्जेंस किया व गुड गवर्नेंस के प्रत्येक मानक की अक्षरश: पालना सुनिश्चित कर राज्य के जनजाति वर्ग व जनजाति बहुल क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित किया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2024 को हजारीबाग से DAJGUA का शुभारम्भ किया। मिशन के तहत 5 साल में 79,156 करोड़ रुपये के बजट के साथ 30 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों के 2,740 ब्लॉकों में 63,843 से अधिक आदिवासी बाहुल्य वाले गांवों को विकास से संतृप्त करना है। इससे 5 करोड़ से अधिक जनजातीय व्यक्ति लाभान्वित हो रहे हैं। इस बजट में केन्द्रीय अंश 56,333 करोड़ रुपये और राज्य अंश 22,823 करोड़ रुपये हैं। राजस्थान के 37 जिलों के 209 ब्लॉक के 6235 ग्रामों को विकसित किया जाना लक्षित किया गया है।

धरती आभा अभियान का मकसद अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जनजातीय समुदायों तक जागरूकता और पहुंच बढ़ाकर उनका सशक्तीकरण सुनिश्चत करना है। धरती आबा और पीएम-जनमन केन्द्र सरकार की बेहद उच्च प्राथमिकता वाले अभियान/योजनाओं में शामिल हैं, जिनकी प्रगति की मॉनिटरिंग करने तथा आवश्यकता वाले क्षेत्र में नवाचार के लिए बहुत उच्च स्तरीय सिस्टम कार्यरत है।

मिशन के उद्देश्यों में व्यक्तिगत अधिकारों, हकों और प्रमुख सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना, दस्तावेजों और लाभों की घर-घर डिलीवरी सुनिश्चित करना, सामुदायिक लामबंदी के माध्यम से सहभागी शासन को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ ही जनजातीय युवाओं को डिजिटल योद्धा और जमीनी स्तर पर परिवर्तन लाने वाले के रूप में सशक्त बनाना, गांव और बस्ती स्तर पर एससीडी स्क्रीनिंग, जागरूकता और परामर्श भी मिशन की प्रमुख गतिविधियों में शामिल रहा।

अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना (DAPST) के तहत अगले 5 वर्षों में लक्ष्य यथा पक्के मकान (नल कनेक्शन, बिजली आपूर्ति सहित), पात्र एसटी परिवारों को आयुष्मान भारत कार्ड, सड़क निर्माण, इन्टरनेट, स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में सुधार के लिए बुनियादी ढांचे का विकास, कौशल प्रशिक्षण, जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केन्द्र, जनजातीय होम स्टे, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, मोबाईल मेडिकल यूनिट, आईएमआर एवं एमएमआर टीकाकरण, वनाधिकार पट्टा धारकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ तथा सिकल सेल रोग का इलाज इस मिशन के लक्ष्य हैं।

समस्त पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अन्तर्गत पक्के मकान , प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अन्तर्गत चिन्हित ग्रामों को संपर्क सड़क से जोड़ना, जल जीवन मिशन में चिन्हित ग्रामों में प्रत्येक परिवार को जल आपूर्ति, 20 परिवारों से अधिक आबादी वाली बस्तियों को सामुदायिक जल नल से जोड़ना, चिन्हित ग्रामों में प्रत्येक अविद्युतिकृत परिवार एवं सार्वजनिक संस्थान को गृह विद्युतिकरण (RDSS) से जोड़ना, प्रत्येक अविद्युतिकृत परिवार एवं सार्वजनिक संस्थान, जो ग्रिड के माध्यम से कवर नहीं हैं, को ऑफ ग्रिड सोलर से जोड़ना , चिन्हित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये पहाड़ी क्षेत्रों में 5 किमी. तथा मैदानी क्षेत्रों में 10 किमी से अधिक दूरी पर स्वास्थ्य सुविधाएं वाले ग्रामों में मोबाइल मेडीकल युनिट लगाये जाने तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अन्तर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराये जाने के प्रावधान किये गये हैं।

चिन्हित गांवों में पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना अन्तर्गत LPG गैस कनेक्शन पोषण अभियान अन्तर्गत 567 सक्षम आंगनवाड़ी सेन्टर्स के उन्नयन व निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत ऐसे ग्राम, जिनमें 5 किमी. की परिधि के भीतर माध्यमिक स्तर के विद्यालय नहीं हैं, उन ग्रामों हेतु छात्रावासों के निर्माण का लक्ष्य है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत पोषण वाटिकाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन पोषण वाटिकाओं की स्थापना राज्य के एकलव्य मॉडल रेजिडेन्शियल स्कूलों में की जा रही है। चिन्हित ग्राम, जो अन्यथा किसी मोबाइल नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं, को बीएसएनएल से जोड़ा जा रहा है। स्किल इण्डिया मिशन के तहत कौशल विकास केन्द्र स्थापना, वन धन विकास केन्द्र स्थापना एवं जनजातीय समूह आदि को प्रशिक्षित करना,

डिजीटल इण्डिया मिशन के लक्ष्य अनुरूप समस्त लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाना है। टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने हेतु राज्य के वनाधिकार पट्टा धारकों में से पात्र किसानों को विभाग की विविध योजनाओं में लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित है। मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत मछली पालन सहायता हेतु तथा राष्ट्रीय पशुधन मिशन अन्तर्गत पशुधन पालन हेतु राज्य के वनाधिकार पट्टा धारकों में से पात्र पशुपालक / मछुआरों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत वनाधिकार से संबद्ध समस्त ग्राम सभाओं, उपखण्ड, जिला व राज्य स्तर के अधिकारियों की कपैसिटी बिल्डिंग हेतु लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

स्वदेश दर्शन के तहत ट्राइबल होम स्टे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस हेतु नये निर्माण पर प्रति इकाई 5 लाख व नवीनीकरण हेतु 3 लाख का प्रावधान किया गया है। जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा आश्रम छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों का उन्नयन एवं सुधार, जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केन्द्रों की स्थापना, सिकल सेल रोग निदान के लिए परामर्श एवं जागरूकता हेतु सेंटर ऑफ कॉम्पीटेंस की स्थापना, वनाधिकार दावों की प्रक्रिया के सपोर्ट एवं डिजीटलीकरण हेतु एफ. आर. ए. सेल की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। अभियान के तहत आश्रम छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों के निर्माण, उन्नयन एवं सुधार हेतु राशि रु.340.59 करोड़ के अनुमोदित कार्यों के लिए 350.12 करोड़ रू. की स्वीकृति जारी की जा चुकी है, जिनमें से अधिकांश कार्य निर्माणाधीन हैं।

वनाधिकार हेतु 18 जिलों एवं राज्य स्तर पर कुल 19 वनाधिकार प्रकोष्ठ गठन हेतु 3.45 करोड़ रू. का अनुमोदन किया गया है, जिसके तहत जिला सिरोही, प्रतापगढ़, बारां, बांसवाड़ा, उदयपुर, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमन्द, कोटा, अलवर, धौलपुर, टोंक, चित्तौड़गढ़, एवं पाली में वनाधिकार प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। जिला उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, बारां व सिरोही में जनजाति बहुउद्देशीय विपणन केन्द्र (Tribal Multipurpose Marketing Centre) हेतु 6.00 करोड़ रू. की स्वीकृति जारी की गई है। सिकल सेल रोग निदान के लिए परामर्श एवं जागरूकता हेतु आरएनटी मेडीकल कॉलेज, उदयपुर में Centre of Competence की स्थापना हेतु 3.10 करोड़ रू.का अनुमोदन किया गया है।

आदि कर्मयोगी अभियान एवं आदि सेवा केन्द्र

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत ही केन्द्र सरकार द्वारा आदि कर्मयोगी अभियान चलाया गया, जिसके अन्तर्गत प्रथम चरण में 26 जिलों को चयनित किया गया, जिसमें 8 राज्य मास्टर ट्रैनर्स, 162 जिला मास्टर ट्रैनर्स, 1,082 ब्लॉक मास्टर ट्रैनर्स तथा 1,16,670 ग्राम स्तरीय आदि कर्मयोगियों, आदि सहयोगियों व आदि साथियों को प्रशिक्षित किया गया। आदि कर्मयोगी अभियान के तहत अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत करने के लिये प्रत्येक चिन्हित ग्राम में एकल खिड़की केन्द्रों के रूप में ‘आदि सेवा केन्द्र’ की स्थापना कराई गई है। इन केन्द्रों की परिकल्पना समुदाय-स्वामित्व वाले केन्द्रों के रूप में की गई है, जो योजनाओं की पहुंच, समय पर शिकायत निवारण एवं सहभागी ग्राम प्रशासन सुनिश्चित कर रहे हैं। प्रत्येक आदि सेवा केन्द्र पर इन कार्यों हेतु दो आदि कर्मयोगी वॉलंटियर्स को लगाया गया है। आदि सेवा केन्द्र की सेवाओं हेतु सप्ताह में एक दिवस कार्यालय समय में पूरा दिन तथा एक अन्य दिवस में एक घण्टा निर्धारित किया गया है, जिसमें ग्रामवासियों द्वारा सेवाऐं ली जा सकेंगी।

राजस्थान रहा टॉपर

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अन्तर्गत दिनांक 15 जून, 2025 से 15 जुलाई, 2025 तक धरती आबा जन भागीदारी अभियान चलाया गया गया। जनजाति बहुल क्षेत्रों में विकास कार्य व सरकारी सेवाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने, शिकायत निवारण प्रणाली को पूर्ण प्रभावी बनाने और जनजाति वर्ग के अधिकारों की अक्षरशः पालना, उनके कल्याण और उत्थान के मामले में राजस्थान देश में नम्बर 1 पर है।

इसके साथ ही जनजातीय युवाओं को डिजिटल योद्धा और जमीनी स्तर पर परिवर्तन लाने वाले के रूप में सशक्त बनाना, गांव और बस्ती स्तर पर एससीडी स्क्रीनिंग, जागरूकता और परामर्श भी मिशन की प्रमुख गतिविधियों में शामिल रहा।

राजस्थान की विशेष उप​लब्धि

राजस्थान में जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए टीएसपी फंड को 1000 करोड़ रूपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये किया है।
सामुदायिक वनाधिकार क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित गोविंद गुरु जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना प्रारंभ की है।
250 नवीन मां-बाड़ी केंद्रों की स्थापना।
अशोक लीलैंड प्रशिक्षण केंद्र, रेलमगरा में 25 युवाओं को भारी वाहन चालक का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया।
डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर में जनजाति नायकों के स्मारक और वीर बालिका काली बाई संग्रहालय का निर्माण, बारां जिले में 17 मल्टीपरपज केंद्र महत्वपूर्ण कदम है ।
सीताबाड़ी, कमलनाथ महादेव और जावर माता मंदिर जैसे आस्था स्थलों पर आधारभूत सुविधाएं।
‘जयकार प्रोग्राम’ में उदयपुर के ईएमआरएस विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान प्रशिक्षण प्राप्त किया।
माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान में ‘बनफूल डिज़ाइन स्टूडियो’ की स्थापना, पारंपरिक कला संरक्षण और विपणन।
‘प्रोजेक्ट चितेरा’ में छात्रावास और विद्यालयों में मांडना व पारंपरिक चित्रकला को पुनर्जीवित।
एम्स, जोधपुर के सहयोग से आबूरोड (सिरोही) में सैटेलाइट सेंटर फॉर ट्राइबल हेल्थ एंड रिसर्च, 29 अक्टूबर, 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा ड्रोन दवा आपूर्ति सुविधा का शुभारंभ।

  • ‘माई मिशन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग

इस अभियान में उत्तम प्रगति के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राजस्थान को सम्मानित किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग श्री कुंजीलाल मीणा ने यह सम्मान ग्रहण किया।इसी अभियान के तहत गत 18 मई से 25 मई तक “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” का सफल आयोजन किया गया।

‘पीएम-जनमन’ से बारां की 149 ग्राम पंचायतों के 324 गांवों में सहरिया समुदाय तक पहुंच रही मूलभूत सुविधाएं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 18 राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के उद्देश्य से कुंठी, झारखंड से 15 नवम्बर, 2023 को पीएम जनमन का शुभारम्भ किया। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) समुदायों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए इस अभियान के तहत विभिन्न योजनाओं का संचालन किया है। बारां जिले में सहरिया समुदाय को आवास, सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं से जोड़ने के लिए कार्य किए हैं। राज्य में सहरिया पीवीटीजी समुदाय की आबादी करीब 1.30 लाख है। यह समुदाय बारां जिले की 149 ग्राम पंचायतों के 324 राजस्व गांवों में निवास करता है।

22 सड़कों का कार्य पूराः अभियान के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से 14 हजार 671 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, चार हजार से अधिक परिवारों को नल कनेक्शन और 16 हजार से अधिक पात्र एवं वंचित परिवारों को विद्युत कनेक्शन जारी किए हैं। क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए 22 सड़कों का कार्य पूरा किया है।

शिक्षा और कौशल विकास पर जोरः पीवीटीजी समुदाय के बच्चों और युवाओं के लिए 15 बहुउद्देश्यीय केन्द्र, 51 आंगनबाड़ी केन्द्र और 51 वन-धन केन्द्र संचालित किए हैं। दो छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि 19 अन्य छात्रावासों का कार्य जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएंः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की आठ मोबाइल चिकित्सा इकाइयां जनजातीय क्षेत्रों में संचालित हैं। इनके माध्यम से अब तक 2 लाख 45 हजार से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है।

नंदिनी भार्गव—अनीशा सहारन

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